जब किसी देश का कुल खर्च उसके राजस्व (Revenue) से अधिक हो जाता है, तब वह देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर्ज लेता है। कोई भी देश मुख्य रूप से दो तरीकों से कर्ज लेता है—पहला, आंतरिक कर्ज (Domestic Debt) और दूसरा, बाहरी कर्ज (External/Foreign Debt)। वित्त मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक भारत पर कुल सार्वजनिक कर्ज लगभग ₹185.94 लाख करोड़ (लगभग $2.09 ट्रिलियन से अधिक) होने...